मुक्तक

आज भी तेरी जिग़र में आरज़ू जवां है।
आज भी निगाह में ख्व़ाबों का कारवां है।
उल्फ़त के समन्दर में तूफ़ान हैं लेकिन-
मुसीबत में ठहरने का हौसला रवां है।

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Lives in Varanasi, India

1 Comment

  1. राही अंजाना - July 31, 2018, 11:30 pm

    Waah

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