मुक्तक

वो दर्द वो खामोशी का मंजर नहीं बदला!
तेरी अदा-ए-हुस्न का खंजर नहीं बदला!
शामों-सहर चुभते रहते हैं तीर यादों के,
मेरी तन्हाई का वो समन्दर नहीं बदला!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Lives in Varanasi, India

5 Comments

  1. ज्योति कुमार - June 2, 2018, 10:25 am

    बहुत अच्छा

  2. Anjali Gupta - June 2, 2018, 7:41 pm

    nice

  3. राही अंजाना - June 6, 2018, 10:18 am

    वाह

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