मुक्तक

तुम जो मुस्कुराती हो नजरें बदलकर!
नीयत पिघल जाती है मेरी मचलकर!
चाहत धधक जाती है जैसे जिगर में,
हर बार जुस्तजू की आहों में ढलकर!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Lives in Varanasi, India

5 Comments

  1. Anshita Sahu - May 19, 2018, 7:13 am

    nice

  2. Neha Saxena - May 19, 2018, 10:41 am

    Very nice sir

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