मुक्तक

बंद होकर भी आँखें कुछ बोल जाती हैं!
राह तमन्नाओं की कुछ खोल जाती हैं!
रोशनी जल जाती है यादों की शक्ल में,
दर्द की लहरें जेहन में डोल जाती हैं!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Lives in Varanasi, India

10 Comments

  1. ashmita - April 12, 2018, 10:09 pm

    nice

  2. Panna - April 13, 2018, 1:12 pm

    bahut khoob

  3. राही अंजाना - April 13, 2018, 2:30 pm

    सही है

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