मुक्तक

मैं जब कभी शाम की तन्हाइयों में चलता हूँ!
मैं अपने ख्यालों की खामोशियों में ढलता हूँ!
जब जिंदगी जलती है हालात की ज्वाला से,
मैं वक्त की दीवारों पर बर्फ सा पिघलता हूँ!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Lives in Varanasi, India

3 Comments

  1. ashmita - April 3, 2018, 8:47 pm

    bahut khoob

  2. Neetika sarsar - April 4, 2018, 11:42 am

    very nice

  3. Deepika - April 5, 2018, 11:25 am

    nice

Leave a Reply