मुक्तक

तेरे दिल की बात बदल न जाए कहीं!
वक्ते-मुलाकात निकल न जाए कहीं!
कब तक करूँ यकीन तेरे प्यार पर?
तन्हाई में रात ढल न जाए कहीं!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Lives in Varanasi, India

6 Comments

  1. Panna - March 13, 2018, 10:16 am

    उम्दा

  2. Panna - March 13, 2018, 10:17 am

    रोशनी है अभी आ जाओ, शमा जल रही है
    मोम मोहब्बत की कहीं पिघल न जाए कहीं

  3. DV - March 13, 2018, 10:19 am

    beautiful poetry … congratulations

  4. Ayush - March 14, 2018, 12:20 am

    Nice

  5. राही अंजाना - July 31, 2018, 10:52 pm

    Waah

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