मुक्तक

जब कोई जिन्दगी मजबूर हो जाती है!
राह मुश्किलों की मग़रूर हो जाती है!
मंजिल निगाहों में करीब होती है मगर,
तकदीर उम्मीदों से दूर हो जाती है!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Lives in Varanasi, India

5 Comments

  1. Ashok babu Mahour - March 9, 2018, 5:07 pm

    बहुत बढ़िया मिथिलेश जी

  2. Priya Gupta - March 9, 2018, 9:37 pm

    nice

  3. Anjali Gupta - March 10, 2018, 10:51 am

    Hamesha ki tarah bahut hi khoobsurat

  4. Panna - March 10, 2018, 11:39 am

    Nice one..
    जितना जिंदगी को पास बुलाओ
    जिंदगी उतना दूर हो जाती है
    मंजिलो पर नजर रखते रखते
    पैरों से राह गुम हो जाती है

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