मुक्तक

सियासी आदमी हरगिज़ तुम्हारा हो नहीं सकता।
कोई भी मतलबी दुःख में सहारा हो नहीं सकता।
जमीं ग़र रो रही है तो सुनो बस बेबकूफ़ी है-
फ़लक़ का है जमीं का तो सितारा हो नहीं सकता।

ठा. कौशल सिंह✍️

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3 Comments

  1. Neha - March 6, 2018, 5:16 pm

    True…each word is marvelous

  2. Anirudh sethi - March 6, 2018, 5:28 pm

    nice

  3. राही अंजाना - July 31, 2018, 11:17 pm

    Waah

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