मुक्तक

मुक्तक

मैं इत्तेफाक से गुनाह कर बैठा हूँ!
तेरे रुखसार पर निगाह कर बैठा हूँ!
शामों-सहर रहता हूँ बेचैन इसकदर,
तेरे लिए जिन्दगी तबाह कर बैठा हूँ!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Lives in Varanasi, India

2 Comments

  1. Rajendra - July 25, 2017, 10:48 pm

    बेहतरीन प्रस्तुति मिथिलेश जी।
    लाजवाब जी।

  2. Onyiro - August 1, 2017, 3:03 pm

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