मुक्तक

आज भी मुझमे कही तुम रहते हो

मै तो अनपढ़ हूँ, तुम लिखते रहते हो

धड़कनो के सुर पे जब साज़ लगते है

मै तो खामोश होता हू तुम गाते रहते हो

#VIP~

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6 Comments

  1. सीमा राठी - May 21, 2017, 10:15 pm

    bahut khooob

  2. Vipul - May 22, 2017, 1:07 am

    सादार आभार

  3. Neetika sarsar - May 22, 2017, 11:32 am

    umda

  4. Ramesh Singh - May 22, 2017, 8:53 pm

    Behtareen panktiya

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