मुक्तक

जो यही सजा है मेरे गुनाह की
तो यही सही , लेकिन
सुनवाई का एक मौका तो दे !
(निसार)


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4 Comments

  1. Vipul Mishra - May 20, 2017, 12:21 pm

    उम्दा

  2. Lucky Nimesh - May 19, 2017, 7:51 pm

    Nice

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