मुक्तक

जिस्म है मेरा मगर जिन्दगी तुम्हारी है!
तेरे बगैर तन्हा हर खुशी हमारी है!
सुलग रही है साँसों में आग चाहतों की,
शामे-मयकशी भी मेरी लाचारी है!

#महादेव_की_कविताऐं’

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5 Comments

  1. राही अंजाना - February 16, 2017, 10:10 am

    Waah

  2. Anirudh sethi - February 16, 2017, 11:41 am

    bahut khoob

  3. सीमा राठी - February 16, 2017, 12:20 pm

    mukammal lines

  4. Onyiro Promise - August 1, 2017, 7:35 pm

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