मानवता

मानव मानवता सीखो
मत होड़ करो तुम बढ़ने की

मत काव्य का अपमान करो
देश हित काव्य सृजन करो

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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5 Comments

  1. Akanksha - July 10, 2018, 11:47 pm

    Kya likha hai

  2. Arun - July 10, 2018, 11:47 pm

    Sundar

  3. Arun - July 22, 2018, 11:26 pm

    Waah

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