माथे की लकीरें

माथे की लकीरें

माथे की लकीरें हर दिन बढ़ती जाती है
भविष्य की चिंता रोज उभरती जाती है

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4 Comments

  1. Sridhar - May 26, 2018, 1:16 pm

    उभरती है हर रोज मुश्किलें नदीं में उफ़ान सी
    डूब जाती है हर रोज जिंदगी बेजान सी

  2. Mithilesh Rai - May 27, 2018, 4:25 pm

    बहुत खूब लाजवाब

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