माँ

बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया,

मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया,

भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने,

उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया,

आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी,

आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।।

राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. ashmita - September 22, 2018, 9:58 pm

    Nice poetry

Leave a Reply