माँ बाप के नाम

पैदा कलम से कोई कहानी की जाए,
फिर जज़्बातों की तर्जुमानी की जाए!

खिलावे हैं खुद भूखे रहकर बच्चों को
माँ-बाप के नाम ये जिंदगानी की जाए!

ग़म से तो हाल ही में ही बरी हुए हम,
मुब्तिला होके बर्बाद जवानी की जाए!

सबको आदत हैं बे-वजह हंगामे की,
कभी हक़ की भी हक़बयानी की जाए।

‘तनहा’आईना के सामने लिखे ग़ज़ल,
ऐसे उसकी खुद की पासबानी की जाए!

तारिक़ अज़ीम ‘तनहा’

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

1 Comment

  1. Anjali Gupta - April 23, 2018, 12:48 pm

    nice

Leave a Reply