महसूस न हो

थी मेरी ये ज़िम्मेदारी घर मे कोई मायूस न हो,
मैँ सारी तकलीफेँ झेलूँ और तुम सब महफूज़ रहो,

सारी खुशियाँ तुम्हेँ दे सकूँ, इस कोशिश मे लगा रहा,
मेरे बचपन मेँ थी जो कमियाँ, वो तुमको महसूस न हो!

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2 Comments

  1. Purav Goyal - June 17, 2016, 1:56 pm

    wahhhhhh behad hi khoobsurt laajwab

  2. Varsha Kelkar - June 17, 2016, 8:08 pm

    Bahut khoob

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