मजबूर

जितना पास बुलाया वो उतना दूर होता गया,
रात का अन्धेरा रौशनी में चूर होता गया,
खुदा की बनाई इस मशहूर दुनियाँ में,
इंसा खुद इंसा के हाथों ही मजबूर होता गया।।
राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

1 Comment

  1. Neha - July 11, 2018, 1:56 pm

    Waah

Leave a Reply