भारतीय रेल

#भारतीय_रेल

लोहे की खिड़की पे सिर रखकर,
सपनो को करीब से देखा है,

पहियों के रफ़्तार से,
अनुभव को भरपूर जीता है

इस तरह यादें समेटे सफर चलता जा रहा,
भारतीय रेल का ये साथ अनूठा
अब हमसे न भूला जा रहा,

-मनीष

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

amature writer,thinker,listener,speaker.

1 Comment

  1. राही अंजाना - July 31, 2018, 10:53 pm

    Wah

Leave a Reply