बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है

बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है

बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है,
चोटी की हर गुथ में वो मेरे गम बुहारा करती है।।
राही (अंजाना)

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8 Comments

  1. Antariksha Saha - August 12, 2018, 1:50 am

    Very good bhai

  2. ज्योति कुमार - August 12, 2018, 9:00 am

    Super

  3. Neelam Tyagi - August 12, 2018, 12:21 pm

    nice

  4. ज्योति कुमार - August 13, 2018, 7:46 am

    Waah sir

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