बोध

क्यूँ मनुज अबोध ,
बोध तुझमे ही सब
क्यों करता है खोज ,
शोध तुझमे ही सब
अविराम गति तू ,
विश्राम तुझमे ही सब

–विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)–

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5 Comments

  1. Vijayanand V Gaitonde - July 2, 2018, 7:09 pm

    Ati sundar & delighting… Commends…!

  2. राही अंजाना - July 4, 2018, 3:28 pm

    वाह

  3. Akanksha - July 22, 2018, 12:09 pm

    Waah

  4. Vinita Shrivastava - July 31, 2018, 10:40 pm

    Thanks

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