बेरोजगार

बेरोजगार

मै एक बेरोजगार हूँ,
हाथ पैर रहते हुए भी लचार हुँ।
बड़े बुजर्गों के समाने मै बेकार हुँ,
क्योकि मै बेरोजगार हूँ।।
अब अंतिम आसरा शिर्फ केवल बेरोजगारी भत्ता है,
जिसकी निर्णयकार्ता 56 इंच सीने वाले है,
नौकरी बन गई समाजिक हैसियत का पैमाना,
नही मिलने पर दुर्लभ हो गया समाज मे जीना,
रोज पड़ोसी वाला 4—5 ताना ।।
इम्लाँयमेंट ,एक्सचेंज बन गया बेरोजगारो का सिवाला,
दर पर माथे पटक ते पटकते निकल रहा निवाला।।
गहन धुप हो या बरसात,
मै बेरोजगार करता रहता हूँ एक ही बात,
ये खुदा कही से नौकरी का बरसात कर दे।
तमाम डिग्री लिए भीख माँग रहे,
नौकरसाही के बच्चे नही परतीभा होने के बाबजुद नौकरी (पोस्ट) पर सिगरेट की धुँआ उडा रहे, और उड़ा रहे मजाक सरकारो की।
और मै गरीब बेरोजगार भटक रहे है नौकरी की परवाहो मे,,
ऐसे मे प्रभु हम गरीब बेरोजगार क्या करे,
जीवन बीता दिए नौकरी पाने मे।।

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3 Comments

  1. राही अंजाना - July 3, 2018, 2:34 pm

    Waah

  2. 195360191164801 - July 4, 2018, 5:39 am

    बहुत सुंदर भैया आप ने हमलोगों की व्यथा को प्रकाशित किया।। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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