बेरंग इश्क़

उकेरे कई चित्र प्राण के पृष्ठ पर,

सब मिट-मिट गए एक तू ही सजा।

रंग की कुचियाँ सब हुई बावली,

रंग कोई नहीं मुझमें भर सका।

अर्चना वर्मा

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6 Comments

  1. JYOTI BHARTI - March 21, 2017, 8:50 pm

    Wow…. amazing

  2. Panna - March 21, 2017, 8:55 pm

    behatreen

  3. Ajay Nawal - March 22, 2017, 3:57 pm

    nice

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