//बेजा कब्जा// (नवगीत)

नाचत हे परिया

गावत तरिया
घर कुरिया ला, देख बड़े ।

सुन्ना गोदी अब भरे
दिखे आदमी पोठ
अब सब झंझट टूट गे
सुन के गुरतुर गोठ

सब नरवा सगरी
अउ पयडगरी
सड़क शहर के, माथ जड़े ।

सोन मितानी हे बदे,
करिया लोहा संग
कांदी कचरा घाट हा
देखत हे हो दंग

चौरा नंदागे,
पार हरागे
बइला गाड़ी, टूट खड़े ।

छितका कोठा गाय के
पथरा कस भगवान
पैरा भूसा ले उचक
खाय खेत के धान

नाचे हे मनखे
बहुते तनके
खटिया डारे, पाँव खड़े ।।

.रमेश चौहान

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7 Comments

  1. Neelam Tyagi - September 24, 2016, 11:48 pm

    Nice

  2. Anirudh sethi - September 24, 2016, 11:58 pm

    bahut khoob

  3. Priya Bharadwaj - September 25, 2016, 12:24 am

    laajbaab

  4. Puneet Sharma - September 25, 2016, 4:39 pm

    bahut bahut muda rachna!

  5. Panna - September 25, 2016, 8:15 pm

    nice

    • ramesh chauhan - November 6, 2016, 9:43 pm

      छत्तीसगढ़ी नवगीत

      • ramesh chauhan - November 6, 2016, 9:45 pm

        छत्तीसगढ़ी नवगीत के ये प्रयास ला सराहे बर आपके अंतस ले आभार

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