बिसात शतरंज की आज भी लगा लेता हूँ

बिसात शतरंज की आज भी लगा लेता हूँ

बिसात शतरंज की आज भी लगा लेता हूँ,

चाल अपने हुनर की आज भी दिखा लेता हूँ,

हाथी और घोड़ों की आज भी पहचान नहीं है मुझे,

तो अपने पैदल भी मैं बड़े मोहरों से भिड़ा देता हूँ,

छोड़ नहीं पाया हूँ एक आदत आज भी पुरानी,

तो दो कश लगा कर तुझे आज भी भुला लेता हूँ।।

राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

8 Comments

  1. Neha - May 11, 2018, 9:50 pm

    Kya baat h

  2. Ravi - May 12, 2018, 1:49 pm

    Waah

  3. Shruti - May 12, 2018, 2:49 pm

    Nice g

  4. Ujjwal - May 12, 2018, 10:11 pm

    Waah

  5. Baba - May 13, 2018, 9:17 am

    Badhiya

  6. Alka - May 13, 2018, 9:30 am

    Nice

  7. Shakku - May 13, 2018, 9:48 am

    Khamajham

  8. Madhyam - May 13, 2018, 9:58 am

    Ye mst

Leave a Reply