बिसात शतरंज की आज भी लगा लेता हूँ

बिसात शतरंज की आज भी लगा लेता हूँ

बिसात शतरंज की आज भी लगा लेता हूँ,

चाल अपने हुनर की आज भी दिखा लेता हूँ,

हाथी और घोड़ों की आज भी पहचान नहीं है मुझे,

तो अपने पैदल भी मैं बड़े मोहरों से भिड़ा देता हूँ,

छोड़ नहीं पाया हूँ एक आदत आज भी पुरानी,

तो दो कश लगा कर तुझे आज भी भुला लेता हूँ।।

राही (अंजाना)

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8 Comments

  1. Neha Saxena - May 11, 2018, 9:50 pm

    Kya baat h

  2. Ravi Singh - May 12, 2018, 1:49 pm

    Waah

  3. Shruti - May 12, 2018, 2:49 pm

    Nice g

  4. Ujjwal - May 12, 2018, 10:11 pm

    Waah

  5. Baba - May 13, 2018, 9:17 am

    Badhiya

  6. Alka - May 13, 2018, 9:30 am

    Nice

  7. Shakku Mathur - May 13, 2018, 9:48 am

    Khamajham

  8. Madhyam Saxena - May 13, 2018, 9:58 am

    Ye mst

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