बाबुजी की याद में…..

*ओ बाबुजी…*

बहुत याद आते हो ओ बाबूजी
दिल को रुलाते हो ओ बाबुजी ।।

जीना तुम्हारे बिन गवारा नहीं
धड़कते हो सीने में ओ बाबुजी।।

अंधेरी है दुनिया अंधेरी है राहें
अंधेरी है खुशियां ओ बाबुजी।।

रोता है सूरज पूरब सुबह से
अश्क़ों में डूबे दिन ओ बाबुजी।।

घर की दीवारें आसमा सितारे
क्षितिज तक है सुबकन ओ बाबुजी।।

नींद और निवाले भी दुश्मन हुए
सांस भी खिलाफत में ओ बाबूजी।।

सुबह के अज़ान और प्रभु आरती
कुछ भी नहीं भाते ओ बाबुजी।।

जिद्द है हमारी की लौट आओ तुम
हठ न छोड़ेंगे हम ..ओ बाबुजी ।।

@-1813/15.


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1 Comment

  1. Yogi Nishad - December 30, 2017, 9:25 pm

    इक छाव सा था,जहां बचपन गुजरा

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