बहुत परेशान करती है तन्हा रातें हमकों।

बहुत परेशान करती है तन्हा रातें हमकों।
मुसल्सल याद आती है मुलाकातें हमको।।
,
ऐसे क्यूँ ख़फ़ा हो गए बिना सबब के तुम।
क़ोई वजह थी जहन में तो बताते हमकों।।
,
ख़ुद मुज़रिम होके हमें गुनाहगार कह दिया।
अपनी बेगुनाही के सबूत तो दिखाते हमको।।
,
अश्कों की वज़ह बनते है ख़त मेरे अक्सर।
कहतें हो तो फ़िर क्यूँ नहीं जलातें हमकों।।
,
कहना आसान है ओ वादे भी तमाम होते है।
पर क़ोई रिश्ता कहा था तो निभाते हमकों।।
,
जिसे भूलना हो वो याद क्या रखता आखिर।
लेकिन कहता है तारीखें याद दिलाते हमकों।।
@@@@RK@@@@

Previous Poem
Next Poem

सर्वश्रेष्ठ हिन्दी कहानी प्रतियोगिता


समयसीमा: 24 फ़रवरी (सन्ध्या 6 बजे)

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. Dinesh Sharma - April 17, 2017, 11:37 am

    so nice ., maza aa gaya bhai

Leave a Reply