बखूबी

बहुत ही बखूबी से तुमने मुझे नज़रन्दाज़ किया,
जानते हुए भी मुझको क्यूँ अनजान किया,
जब खामोश मोहब्बत ही हमारी जुबान थी,
तो क्यों रिश्तों को अपने यूँ अज़ान किया॥
To be cont..
राही (अंजाना)


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इलज़ाम

सरेआम रक्खे हैं।

बैठी है

बैठी है

जवाब माँगता है

2 Comments

  1. Profile photo of Kumar Bunty

    Kumar Bunty - April 10, 2017, 12:08 am

    KABIL-E-TAARIF

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