फौलादी फौजी

हाथ में हथियार और दिल को फौलाद किये बैठे हैं,
सरहद के हर चप्पे पर हम बाज की नज़र लिये बैठे हैं,
जहाँ सो जाता है चाँद भी चैन से हर रात में,
वहीं खुली आँखों में अमन का हम सपना लिए बैठे हैं,
ठण्ड से सिकुड़कर सिमट जाते हैं हौंसले जहाँ,
वहीं बर्फीली चादर में भी उबलता जिगर लिए बैठे हैं,
डर कर अँधेरी गलियों से भी नहीं गुजरते जहाँ कुछ लोग,
वहीं हम सैनिक हर लम्हा दुश्मनों के बीच फंसे बैठे हैं॥
राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

इलज़ाम

सरेआम रक्खे हैं।

बैठी है

बैठी है

जवाब माँगता है

13 Comments

  1. SACHIN SANSANWAL - February 7, 2017, 10:48 pm

    suprb wordings (y)

  2. Panna - February 7, 2017, 10:55 pm

    nice

  3. Anirudh sethi - February 8, 2017, 7:38 pm

    wah

  4. Kanchan Pant - February 8, 2017, 8:44 pm

    awesome!!

  5. Mithilesh Rai - February 9, 2017, 6:06 am

    बेहतरीन सृजन

  6. Mithilesh Rai - February 9, 2017, 6:06 am

    बहुत खूब

Leave a Reply