फुलझड़ियाँ

फुलझड़ियाँ

 

आसमाँ छोड़ जब ज़मी पर उतरने लगती हैं फुलझड़ियाँ,
हाथों में सबके सितारों सी चमकने लगती हैं फुलझड़ियाँ

दामन अँधेरे का छोड़ कर एक दिन ऐसा भी आता है देखो,
जब रौशनी में आकर खुद पर अकड़ने लगती हैं फुलझड़ियाँ,

अमीरी गरीबी के इस भरम को मिटाने हर दीवाली पर,
दुनियाँ के हर कोने में बिजली सी कड़कने लगती हैं फुलझड़ियाँ।।

– राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Leave a Reply