प्रातः अभिवादन

“**प्रातः अभिवादन “**
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मित्रतामय जगत सारा ,
मित्रता ही महकती है ।

गुलाबों की तरह हर पल
दुख के शूलों के संग रहती।
निभा कर साथ, सुख दुख में ,
मित्र के सुख दुख को सहती।

हर इक जीवन -परीक्षा में ,
मित्रता याद आती है ।

प्यारे मित्रो ,
सपरिवारसहर्ष
फागुनी सवेरे की
उमंगों से भरे हर पल की
शुभकामनाएँ स्वीकार करें ।

सविनय
आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश,

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