प्राण से प्यारे गणतंत्र

प्राण से प्यारे गणतंत्र,
पल पल कोटि कोटि प्रणाम।

“**फूली नहीं समाती,**
छब्बीस जनवरी।
खुशियों के गीत गाती
छब्बीस जनवरी ।

गांधी भगत बिस्मिल ,
आजाद बोस की,
कुर्बानियाँ सुनाती ,
छब्बीस जनवरी ।

रक्षा करने स्वदेश की ,
हँसते हँसते सर्वस्व लुटाते हैं ।
उन अमर शहीदों को ,
स्वदेशवासी श्रद्धानत होकर शीष झुकाते हैं।

देशवासियों को शुभकामनाएँ, बधाइयाँ।

सविनय,
आप सभी का मित्र
जानकी प्रसाद विवश

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Leave a Reply