पानी पानी की

एक ताज़ा ग़ज़ल ……..

गुलफिशानी – फूलों की बारिश ,
बदगुमानी – शक

********************************

मैंने दुश्मन पे गुलफिशानी की …
आबरू.. उसकी पानी पानी की ….

मुझ पे जब ग़म ने मेहरबानी की …..
मैने फिर ग़म की मेज़बानी की ….

मैं जिन आँखों का ख़्वाब था पहला
क्यों ….. उन्होंने ही बदगुमानी की….

वार मैंने निहत्थों पे न किया
यूँ अदा रस्म ख़ानदानी की …….

होठ उनके न कह सके जब सच
फ़िर निग़ाहों से सच बयानी की ….

सोचा बेहद के क्या रखूँ ता – उम्र
फ़िर ग़ज़ल ” प्रेम ” की निशानी की …..

पंकजोम ” प्रेम ”

***********************************

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

तराश लेता हूँ सामने वाले की फितरत ...... बस एक ही नज़र में ..... जब कलम लिख देती है , हाल - ए - दिल .... तो कोई फ़र्क नहीं रहता ..... जिंदगी और इस सुख़न - वर में....

1 Comment

  1. राही अंजाना - August 12, 2018, 11:34 am

    Waah

Leave a Reply