परिस्थिति

परिस्थियों के एक जाले में बचपन बुना दिखता है,
लकड़ी के फट्टे जैसा ये जीवन घुना दिखता है,

लेखनी पकड़ने वाले हाथों का किस्सा ऐसा,
मानो हर क्षण खुशियों का ईंटों से चुना दिखता है।।

राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

सर्वश्रेष्ठ हिन्दी कहानी प्रतियोगिता


समयसीमा: 24 फ़रवरी (सन्ध्या 6 बजे)

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

1 Comment

  1. Ashok Sharma - February 4, 2018, 3:33 pm

    वाह क़्या बात है .लाजवाब कविता

Leave a Reply