नुक्कड़ पर

नुक्कड़ पर

आज गलियां कुछ सूनी सी है ,

पथिक कम जाते हैं.

गलियों के नुक्कड़ पर

बैठा मैं कुछ सोचता हूँ .

पर क्या क्या जीवन भी पथिक है ,

कभी रुकता कभी चलता है

लेकिन आज उदासी क्यों है ,

लोग डरे सहमे से हैं ,

कारन जान नहीं पाता हूँ ,

कुछ लोगो के नजदीक जाता हूँ,

जो चर्चा कर रहें है किसी बारे  में ,

पूछता हुँ चलकर क्या है  ,

जाता हूँ तो चुप हो जाते है सब …

…atr

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Hi everyone. This is Abhishek from Varanasi.

8 Comments

  1. Panna - October 12, 2015, 12:13 pm

    Nice yaar

  2. Mohit Sharma - October 13, 2015, 6:59 pm

    kisi nukkad par hum bhi milenge kahin 🙂

  3. anupriya sharma - October 14, 2015, 11:26 pm

    Log aksar nukkad par hi milte he….kabhi kuch kahte bhi he..kabhi chup bhi ho jaate he…nukkad hi ahsaaso ka bazaar hota he 🙂

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