निगरानी

निगरानी

चाँद तारे आसमाँ सब की निगरानी करना,

जब तक मैं न आऊँ इतनी मेहरबानी करना,

जिस्म ऐ मोहब्बत पर जब तक रूह का रंग न चढ़े,

गुज़ारिश ये के तुम इस कागज़ी पैहरन की क़ुरबानी करना,

जो मिलूँ न यूँही हकीकत के समन्दर में मैं कहीं,

तो सुनो ख्वाबों के मुहाने पर आकर मेरी मेज़बानी करना।।

राही (अंजाना)

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