निगरानी

पत्थरों की नगरानी में शीशे के दिल रख दिए,
इस नज़्म ऐ जवानी में ये किसने कदम रख दिए,

मशहूर अँधेरे बाज़ार में जो मोल लग चुका था मेरा,
इस ज़ख्म ऐ निशानी में ये किसने मरहम रख दिए,

आहिस्ता-आहिस्ता किसी ख़्वाब की आगोश में जाने से पहले,
इस जश्न ऐ कहानी में ये किसने भरम रख दिए,

दवा और दुआ के दर छोड़ कर तेरी राह में “राही”,
इस जिस्म ऐ रूहानी में ये फूल किसने नरम रख दिए॥
राही (अंजाना)

राही (अंजाना)

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2 Comments

  1. ashmita - November 21, 2018, 8:37 am

    Nice

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