निकल जाऊंगा

सोंचा नहीं था समन्दर के इतना किनारे निकल जाऊंगा,
जिनसे डरता था उन्हीं लहरों के सहारे निकल जाऊंगा,

जहाँ बनाता ही नहीं बह जाने के खौफ से रेत के मकाँ कोई,
वहीं शौक से किरदार को अपने यूँही जमाकर निकल जाऊंगा॥
राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. Panna - February 21, 2018, 2:19 pm

    bahut khoob sir

  2. राही अंजाना - February 24, 2018, 11:50 am

    Thanks panna

Leave a Reply