नव वर्ष आने को है

नव वर्ष आने को है,
कुछ भुलाने को है कुछ याद दिलाने को है,
सच कहूँ तो बहुत कुछ सिखाने को है,
छुप गई थीं जो बादल के पीछे कहीँ,
उन उम्मीदों से पर्दा हटाने को है,
नया वर्ष आने को है,
सपनों की हकीकत बताने को है,
नए रिश्तों के चेहरा दिखाने को है,
टूट गई थी कभी जो राहें कहीँ,
उन राहों पर पगडण्डी बनाने को है,
नव वर्ष आने को है,
उड़ने को काफी नहीं पंख देखो,
हौंसलो के घने पंख फैलाने को है,
बीती बातों का आँगन भुलाने को है,
फिर नई आशा मन में जगाने को है,
नव वर्ष आने को है।।
राही (अंजाना)

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2 Comments

  1. Ritu Soni - December 29, 2017, 2:54 pm

    shakun ji please vote for my poem naya saal

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