नया साल

नया साल

Vote 36+

Users who have voted this poem:

  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar
  • avatar

पल महीने दिन यूँ गुजरे,
कितने सुबह और साँझ के पहरे ,
कितनी रातें उन्नीदीं सी,
चाँदनी रात की ध्वलित किरणें,
कितने सपने बिखरे-बिखरे,
सिमटी-सिमटी धुँधली यादें,
कुछ कर जाती हैं आघाते ,
कभी सहला ,कर जातीं मीठी बातें,
हौले-हौले साल यूँ गुजरा,
जाते-जाते रूला गया,
नये साल की नयी सुबह से,
दामन अपना छुड़ा गया,
कितने सपने दिखा गया ।

नये साल की नयी सुबह के ,
दहलीज पर आ गए हम,
अनगिनत उम्मिदें बाँध खड़े हम,
कितने सपने इन आँखो के,
धुँधले कुछ है रंग भरे,
उम्मीदों की दरिया में ,
सब,बहने को आतुर बड़े ,
मन बाँवरा गोते खाता,
डूबता और फिर उतराता ।

चलो ठीक है बहने दो,
पल, महीने,दिन में डलने दो,
किस्मत किसकी कब खुल जाए,
मेहनत तो करने दो,
आशाओं की दरिया में ,
जीवन को बहने दो ।

चलो काल के गर्त में सीपियाँ ढूंढे,
कब कोई अनमोल मोती हाथ लग जाये ,
बहते-बहते क्या पता कोई नया तट मिल जाए,
चलो नये साल के पल, महीने,दिन में ढलते हैं,
सुबह-साँझ के पहरे से हम कब डरते हैं,
चलो आशाओं की दरिया में ,जीवन संग बहते हैं ।।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

10 Comments

  1. Girija Arora - January 1, 2018, 12:28 pm

    very nice poem.

  2. 2016570598623337 - December 26, 2017, 5:20 pm

    😊

  3. Yogi Nishad - December 26, 2017, 8:17 am

    बहुत खुब

  4. Priyanka Soni - December 26, 2017, 6:51 am

    बहुत खूब

  5. Dev Rajput - December 24, 2017, 11:45 am

    बेहतरीन कविता

Leave a Reply