दोस्त

तेरे होने ना होने के बीच

मेरी आँखें पिस रही है़ं॥

रह रह के रिस रही हैं

दिन रात घिस रही हैं॥

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सर्वश्रेष्ठ हिन्दी कहानी प्रतियोगिता


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3 Comments

  1. Profile photo of Kavi Manohar

    Kavi Manohar - May 17, 2016, 3:26 pm

    इक तू है जो दिखता है इन आंखों को
    बाकी सब तो दिखना कब का बंद हो गया है|

  2. Panna - May 17, 2016, 3:21 pm

    bahut khoob

  3. Profile photo of Anirudh sethi

    Anirudh sethi - May 17, 2016, 3:21 pm

    nice one!

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