दोस्त

तेरे होने ना होने के बीच

मेरी आँखें पिस रही है़ं॥

रह रह के रिस रही हैं

दिन रात घिस रही हैं॥

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

3 Comments

  1. Anirudh sethi - May 17, 2016, 3:21 pm

    nice one!

  2. Panna - May 17, 2016, 3:21 pm

    bahut khoob

  3. Kavi Manohar - May 17, 2016, 3:26 pm

    इक तू है जो दिखता है इन आंखों को
    बाकी सब तो दिखना कब का बंद हो गया है|

Leave a Reply