तोड़ कर हर ज़ंज़ीर तूने हौंसला दिखाया है

तोड़ कर हर ज़ंज़ीर तूने हौंसला दिखाया है

तोड़ कर हर ज़ंज़ीर तूने हौंसला दिखाया है,

जो बुत बन चुके थे उन्हें भी तूने बोलना सिखाया है,

जुदा रही तू जैसे चाँद की चांदनी से सदियों,

फिर बखूबी तूने सबको अपना रूतबा दिखाया है,

बहुत सहमी सी रही तू घूँघट में छिपकर,

फिर दुनियाँ को बेपरवाह अपना चेहरा दिखाया है,

शक्ल ऐ इंसा पर चढ़ें जानवर के मुखौटे को,

देर से मगर तसल्ली से तूने ये पर्दा हटाया है।।
राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

3 Comments

  1. देव कुमार - June 14, 2018, 8:52 pm

    Asm

  2. देव कुमार - June 18, 2018, 1:32 am

    Welcome

Leave a Reply