तेरा होके और शर्मिन्दा नहीं होना

ज़रा सा गौर से सुन अब ये आईंदा नहीं होना,
कि मुझको तेरा होके और शर्मिन्दा नहीं होना|

जहां मतलबपरस्ती आशनाई नोच खाती है,
मुझे ऐसी तेरी बस्ती का बाशिन्दा नहीं होना|

बहोत ही बेरहम होकर किया था कत्ल खुद तूने,
मेरे दिल में तेरी ख्वाहिश को फ़िर ज़िंदा नहीं होना|

जहां खुदगर्ज़ियों में रास्ते मंज़िल बदलते हैं,
मुझे ऐसी तेरी राहों का कारिन्दा नहीं होना|

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-अनन्य

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1 Comment

  1. MaN(मन) - October 1, 2016, 7:39 pm

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