तू ही हैअर्जुन आवाज सुन

✍🌹 गजल 🌹✍


तू ही हैअर्जुन आवाज सुन
परिवेश का दर्दे साज सुन

छटपटा रही धरती देख तू
माहौल का क्रंदन आज सुन

तेरे शौर्य मे बंधा है वर्तमान
नव नीति का रम्य नाज सुन

हिंसा भय दहशत का है आलम
पीड़ित मानवता का राज सुन

बिलखती धरा को उबारने तू
पुरुषार्थ का अपना अंदाज चुन
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)

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3 Comments

  1. सीमा राठी - March 27, 2018, 4:32 pm

    bahuit badia kavya

  2. DV - March 27, 2018, 5:34 pm

    timely poetry for awaking of people

  3. राही अंजाना - July 31, 2018, 10:44 pm

    Waah

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