तितली

जहाँ भी रहे नज़र आती है,
वो हवाओं सी मुझे सुहाती है,
हाथ आये न आये वो मेरे,
वो तितली अपनी ओर बुलाती है।।
राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

3 Comments

  1. Mithilesh Rai - June 20, 2018, 2:57 pm

    Very nice

  2. Neha - July 8, 2018, 12:44 pm

    Waah

Leave a Reply