तरक़ीब

तरकीब कोई और ढूंढो ऐसे तो नज़र नहीं आने वाला,
छुप कर बैठा है जो अंदर वो तो बाहर नहीं आने वाला,

गहरा समन्दर है बहुत मन के भीतर हम सबके कोई,
बिना डूबे तो देखो अब कोई तैर कर नहीं आने वाला,

फांसला है मीलों का इस ज़मी से उस आसमाँ के जानिब,
चलो अब तुम्हीं साथ मेरे बीच में कोई नहीं आने वाला,

आँखों ही आँखों में हो जाने दो दिल की बातों को सारी,
ज़ुबाँ पर अल्फ़ाज़ों का मन्ज़र अब कोई नहीं आने वाला।।
राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Leave a Reply