तकदीर का क्या, वो कब किसकी सगी हुई है।

तकदीर का क्या, वो कब किसकी सगी हुई है।
दुनिया अपने हौसले से ,जमीं हुई है।
खुशफहमी ना पाल कि नसीब से सब मिलेगा।
कर्म करने से ही ये आसमाँ झूकेगा।
लाख लगाओ फेरे ,मन्दिर, मस्जिद, चर्च ,गुरूद्वारे।
कर्म के आगे, इन्साँ इन्हें भी बिसारे।
समय के चक्र पर निशाना साध ले प्यारे ,
काश के फेर में पड,मत हाँफ दुलारे।
हाय री किस्मत कह फिर रोएगा ,पछताएगा।
एक बार ये समय जो हाथ से निकल जाएगा।
जहाँ साहा इतने दिन,कुछ और धैर्य बना ले।
नोट बन्दी के हवन में कुछ समिधा चढा ले।
फिर आएगी नीत नयी भोर मन में बसा ले।
काले धन वालों से अब पीछा छुडा ले ,
पर आऐंगे कैसे अच्छे दिन ,ये तो बुझा ले।
फिर कैसे ना रिश्वत चलेगी?भ्रष्टाचार ना होगा?
कोई तो सामने आ शपथ दिला दे।
सावित्री राणा
काव्य कुँज।


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6 Comments

  1. Profile photo of Dev Kumar

    Dev Kumar - December 9, 2016, 5:08 pm

    So Nice

  2. Panna - December 7, 2016, 9:54 am

    nice

  3. Akanksha Malhotra - December 4, 2016, 6:22 pm

    nice saavitri ji

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