डूबकर देख लिया

डूबकर
देख लिया ,
जिस घड़ी
से ,
तेरी आँखों में ।

नहीं अब
डूबने से ,
जरा सा भी ,
डर हमें लगता ।

जानकी प्रसाद विवश

प्यारे मित्रो .
सवेरे की गुनगुनी अनुभूतियों का
सपरिवारसहर्ष
हार्दिक अभिवादन.,
हर पल मंगलकामनाएँ
स्वीकार करें ।

आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

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