डर

जीत और हार के डर से आगे निकल आया हूँ,
मैं राही अपने ही सपनों से आगे निकल आया हूँ।।
राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

6 Comments

  1. ज्योति कुमार - July 20, 2018, 7:15 am

    Waah

  2. Panna - July 20, 2018, 9:32 am

    Nice

  3. Neha - July 20, 2018, 8:55 pm

    Waah

Leave a Reply