टूटता जा रहा हूँ मै

टूटता जा रहा हूँ मै .

छूटती हुई राहें-बढ़ता हुआ अँधेरा,

भटकता जा रहा हूँ मै .

टूटता  हुआ किनारा-उमड़ता हुआ सागर ,

डूबता जा रहा हूँ मै .

समाज का बंद कमरा-कमरे में मै अकेला,

घुटता जा रहा हूँ मै .

जिंदगी कि बेवफाई-निराशा कि गहराई,

टूटता जा रहा हूँ मै .

टूटता जा रहा हूँ मै .

-अनिल कुमार भ्रमर –

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

8 Comments

  1. Sridhar - April 5, 2017, 10:58 am

    shaandaar

  2. JYOTI BHARTI - April 5, 2017, 7:00 pm

    Waah

  3. Ramesh Singh - April 6, 2017, 9:11 pm

    बेहतरीन पंक्तिया

  4. Predrag - May 28, 2018, 8:42 pm

    … [Trackback]

    […] Read More on|Read More|Find More Infos here|Here you can find 93683 additional Infos|Informations on that Topic: saavan.in/टूटता-जा-रहा-हूँ-मै/ […]

  5. blokeringer - June 3, 2018, 12:25 am

    … [Trackback]

    […] Read More on|Read More|Read More Infos here|There you can find 61244 more Infos|Informations on that Topic: saavan.in/टूटता-जा-रहा-हूँ-मै/ […]

Leave a Reply